उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों में हर साल गर्मियों के महीनों में चारधाम यात्रा का आयोजन होता है। इनधामों मे से केदारनाथ धाम भी एक है जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है..लेकिन केदारनाथ के साथ साथ चार और मंदिर भी हैं जिनकी मान्यता भी केदारनाथ के बराबर ही मानी गई है…केदार समेत इन पांचों मंदिरो को पंचकेदार के नाम से जाना जाता है..ये पंचकेदार भगवान शिव के पावन स्थान हैं…स्कंद पुराण के केदारखंड में भी इन पांच केदारों का स्पष्ट रूप से वर्णन है….पंच केदार में प्रथम केदार भगवान केदारनाथ हैं, जिन्हें बारहवें ज्योर्तिलिंग के रूप में भी जाना जाता है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर हैं। तृतीय केदार तुंगनाथ, चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ और पंचम केदार कल्पेश्वर हैं।

क्या है कथा

पंच केदार की कथा है कि महाभारत युद्ध में विजयी होने पर पांडवों को अपेन भाइयों की हत्या करने का श्राप लगा था..इसे श्राप से मुक्ति के लिए पांडलवों क भगवान शिव का आशीर्वाद लेन था.. इसलिए पांडव भगवान शिव को खोजते हुए हिमालय पहुंचे।

लेकिन शिवजी पांडवो को दर्शन नही देन चाहते थे..इसलिए केदार में बस गए..पांडव उनका पीछा करते-करते केदार पहुंच गए। भगवान शंकर ने बैल का रूप धारण कर लिया और अन्य पशुओं के साथ चमिल गए। लेकिन पांडवों को संदेह हुआ तो भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया। भीम ने दो पहाड़ों पर पैर फैला दिए। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए पर भगवान शंकर रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बैल पर झपटे तो बैल भूमि में अंतरध्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति और दृढ़ संकल्प देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं

माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतरध्यान हुए तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमाण्डू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मद्महेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुईं। इसलिए इन चार स्थानों के साथ केदारनाथ धाम को पंचकेदार कहा जाता है।

1- केदारनाथ धाम

Shri Kedarnath Dham

समुद्र की सतह से करीब साढ़े 12 हजार फीट की ऊंचाई पर केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। बारह ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ धाम का सर्वोच्य स्थान है। साथ ही यह पंच केदार में से एक है। केदारनाथ धाम में भगवान शिव के पृष्ट भाग के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने कराया था। जबकि आदि शंकराचार्य ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। मंदिर की विशेषता यह है कि 2013 की भीषण आपदा में भी मंदिर को आंच तक नहीं पहुंची थी।

2- मद्महेश्वर मंदिर

Madhyamaheshwar Temple Uttarakhand

मद्महेश्वर मंदिर बारह हजार फीट की ऊंचाई पर चौखंभा शिखर की तलहटी में स्थित है। मद्महेश्वर द्वितीय केदार है, यहां भगवान शंकर के मध्य भाग के दर्शन होते है। दक्षिण भारत के शेव पुजारी केदारनाथ की तरह यहां भी पूजा करते हैं। शीतकाल में छह माह यहां पर भी कपाट बंद होते हैं। कपाट खुलने पर यहां पूजा अर्चना होती है।

3- तुंगनाथ मंदिर

Tungnath temple

तुंगनाथ भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित मंदिर है। तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध तुंगनाथ मंदिर समुद्र तल से 3700 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां भगवान शिव की भुजा के रूप में आराधना होती है। चंद्रशिला चोटी के नीचे काले पत्थरों से निर्मित यह मंदिर बहुत रमणीक स्थल पर निर्मित है। कथाओं के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पांडवों ने मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर को 1000 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है।

4- रुद्रनाथ मंदिर

rudranath temple uttarakhand

चतुर्थ केदार के रूप में भगवान रुद्रनाथ विख्यात हैं। यह मंदिर समुद्र तल से 2286 मीटर की ऊंचाई पर एक गुफा में स्थित है। इस गुफा में भगवान शिव के मुख के दर्शन में होते हैं। भारत में यह अकेला स्थान है, जहां भगवान शिव के चेहरे की पूजा होती है।

5- कल्पेश्वर मंदिर

kalpeshwar temple uttarakhand

पंचम केदार के रूप में कल्पेश्वर या कल्पनाथ मंदिर विख्यात हैं। यहां भगवान की जटा के दर्शन होते हैं, बारहों महीने यहां भगवान शिव के दर्शन होते है। कहते हैं कि इस स्थल पर दुर्वासा ऋषि ने कल्प वृक्ष के नीचे घोर तपस्या की थी। तभी से यह स्थान ‘कल्पेश्वर या ‘कल्पनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 2134 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए 10 किमी पैदल चलना होता है।