हम बचपन से ही ब्रह्म मुहूर्त के बारें में सुनते आ रहे है । अगर  हम  ब्रह्म मुहूर्त में जागकर कोई भी अभ्यास करते हैं तो यह सबसे ज्यादा फल दायक होता है । एक विद्यार्थी से लेकर एक सन्यासी तक के लिए ब्रह्म मुहूर्त  लाभकारी होता है।

ब्रह्म मुहूर्त को लेकर  लोगों के मन में अक्सर कुछ सवाल आते है ,जैसे दिन के कौन से पहर को इसकी शुरुआत होती है, यह खत्म कब तक होता है? इस मुहूर्त का बेहतरीन फायदा कैसे ले सकते हैं  अथवा इस समय ध्यान या कोई क्रिया अथवा दोनों कर सकते हैं?

24 घंटे में 30 मुहूर्त होते हैं। ब्रह्म मुहूर्त रा‍त्रि का चौथा प्रहर होता है। सूर्योदय के पूर्व के प्रहर में दो मुहूर्त होते हैं। उनमें से पहले मुहूर्त को ब्रह्म मुहूर्त कहते है। दिन-रात का 30वां भाग मुहूर्त कहलाता है अर्थात 2 घटी या 48 मिनट का कालखंड मुहूर्त कहलाता है। उसके बाद वाला विष्णु का समय है जबकि सुबह शुरू होती है लेकिन सूर्य दिखाई नहीं देता।  ब्रह्म मुहूर्त का वास्तविक समय सुबह के साढ़े तीन बजे का होता है,  ब्रह्म मुहूर्त का महत्व सिर्फ 33 डिग्री अक्षांश तक के लिए ही होता है। सुबह  03.40 पर सूर्य उस जगह पहुंच जाता है, जहां उसका सीधा संबंध पृथ्वी से हो जाता है। इस समय उसकी किरणें ठीक हमारे सिर के ऊपर होती हैं। जब सूर्य की किरणें धरती के दोनों तरफ एक ही जगह पड़ती हैं, तो मानव तंत्र एक खास तरीके से काम करने लगता है ।  वैसे तो सूर्य हमेशा हमारे सिर के ऊपर ही होता है, लेकिन जब यह कहा जाता है कि सूर्य ठीक हमारे  सिर पर है तो इसका मतलब है उस समय वह हमारे सिर पर लंबवत है। उस समय मानव तंत्र एक विशेष तरीके से काम करता है। यह समय होता है 3.40 से लेकर अगले 12 से 20 मिनट तक।

अगर हम ब्रह्म मुहूर्त में जागकर कोई भी अभ्यास करने बैठते हैं तो यह सबसे ज्यादा फल दायक होता है । उसकी वजह है कि इस समय धरती हमारे तंत्र के अनुसार काम करती है। अगर हम खास तरीके से जागरूक हो जाते हैं, हमारे भीतर एक खास स्तर की जागरूकता आ जाती है तो हमें इस समय का सहज रूप से अहसास हो जाता है। अगर व्यक्ति सही वक्त पर सोने चला जाता हैं तो उसे  उठने के लिए घड़ी देखने की जरूरत नहीं पड़ती है । हमें हमेशा पता चल जाएगा कि कब 3.40 का वक्त हो गया है, क्योंकि यह वक्त होते ही आपका शरीर एक अलग तरीके से व्यवहार करने लगेगा।

ब्रह्म मुहूर्त हमें 4 कार्य ही करना चाहिए: 1. संध्या वंदन, 2. ध्यान, 3. प्रार्थना और 4. अध्ययन। ब्रह्म मुहूर्त में नकारात्मक विचार, बहस, वार्तालाप, संभोग, नींद, भोजन, यात्रा, किसी भी प्रकार का शोर आदि नहीं करना चाहिए। यह देखा गया है कि बहुत से लोग इस समय जोर-जोर से आरती आदि पूजन-पाठ करते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त का महत्व

* इस समय संपूर्ण वातावरण शांतिमय और निर्मल होता है। देवी-देवता इस काल में विचरण कर रहे होते हैं। सत्व गुणों की प्रधानता रहती है। प्रमुख मंदिरों के पट भी ब्रह्म मुहूर्त में खोल दिए जाते हैं तथा भगवान का श्रृंगार व पूजन भी ब्रह्म मुहूर्त में किए जाने का विधान है।

*जल्दी उठने में सौंदर्य, बल, विद्या और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह समय ग्रंथ रचना के लिए उत्तम माना गया है।

*वैज्ञानिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि ब्रह्म मुहुर्त में वायुमंडल प्रदूषणरहित होता है। इसी समय वायुमंडल में ऑक्सीजन (प्राणवायु) की मात्रा सबसे अधिक (41 प्रतिशत) होती है, जो फेफड़ों की शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण होती है। शुद्ध वायु मिलने से मन, मस्तिष्क भी स्वस्थ रहता है। ऐसे समय में शहर की सफाई निषेध है।

*आयुर्वेद के अनुसार इस समय बहने वाली वायु को अमृततुल्य कहा गया है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर टहलने से शरीर में संजीवनी शक्ति का संचार होता है।

*यह समय अध्ययन के लिए भी सर्वोत्तम बताया गया है, क्योंकि रात को आराम करने के बाद सुबह जब हम उठते हैं तो शरीर तथा मस्तिष्क में भी स्फूर्ति व ताजगी बनी रहती है। सुबह ऑक्सिजन का लेवल भी ज्यादा होता है तो मस्तिष्क को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है जिसके चलते अध्ययन बातें स्मृति कोष में आसानी से चली जाती है।

 

।।मुहूर्ते बुध्येत् धर्माथर चानु चिंतयेत। कायक्लेशांश्च तन्मूलान्वेदत वार्थमेव च।।