श्री रामचरित मानस के सिद्ध मंत्र जिन्हे यदि जाप करे तो आपकी विभिन्न प्रकार की भौतिक मनोकामनायें पूर्ण होंगी। ऐसा सिद्ध है !

प्रात: स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध आसन पर विराज मान हो ! तत्पश्चात श्री हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर रुद्राक्ष की माला से १०८ बार उल्लेखित मंत्र का जप करे.

  1. विपत्ति नाश के लिये
    ।।राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।
  2. चिन्ता की समाप्ति के लिये
    ।।जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू।।
  3. नजर झाड़ने के लिये
    ।।स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।
  4. दरिद्रता मिटाने के लिये
    ।।अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।
  5. क्ष्मी प्राप्ति के लिये
    ।।जिमि सरिता सागर महुँ जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।
    तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।
  6. पुत्र प्राप्ति के लिये
    ।।प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
    सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।
  7. मुकदमा जीतने के लिये
    ।।पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।
  8. वार्तालाप में सफ़लता के लिये
    ।।तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।।
  9. विवाह के लिये
    ।।तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै।
    मांडवी श्रुतकीरति उरमिला, कुँअरि लई हँकारि कै।।
  10. ऋद्धिसिद्धि प्राप्त करने के लिये
    ।।साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।
  11. परीक्षा / शिक्षा की सफ़लता के लिये
    ।।जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी।
    मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती।।