नवरात्रि -29 मार्च से प्रारंभ होगी। सूर्योदय के समय बुधवार को प्रतिपदा 6:33 प्रातः तक है ।अतः नवरात्रि बुधवार को प्रारम्भ होगा ।

कलश स्थापना 6:33से पूर्व या दिन भर कर सकते है।

महानिशा –

सोमवार 3 अप्रैल को है ।

 

अष्टमी का व्रत मंगलवार 4 अप्रैल को है।

नवमी का व्रत 5 अप्रैल को है।

नवरात्रि का व्रत करने वाले भक्त 6 अप्रैल को 11:18  दिन से पूर्व पारण करें ।

इस वर्ष माँ दुर्गा का आगमन नौका से होगा ।

(बुधे नौका प्रकिर्तिता)

जो सभी प्रकार से सुखकारी सब सिद्धि प्रदान करने वाला होगा।(नवकायां सरवसिद्धि स्यात्)

माँ दुर्गा हाथी के सवारी से जायेगी ।(बुध शुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहना)

जो शुभ और सुखदायी होगा।(गजवाहना गा शुभ दृष्टि करा)

अर्थात-इस वर्ष सभी को सुख प्राप्त होगा ।

वसन्त ऋतु में यह नवरात्रि होती है ।अतः इसे वसन्त नवरात्र कहते है।इस नवरात्र में माँ दुर्गा गौरी स्वरूप में होती है।

अतः इस नवरात्र में नव गौरी की पूजा होती है।

 

॥प्रेम से बोलो जय माता की॥